घर खरीददार ‘रेरा’ पावर से हैं अनजान

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ज़िन्दगी भर की जमा-पूंजी के रूप में घर है। इस सपना को साकार करना भले ही आसान नहीं हो लेकिन घर खरीददार महत्वपूर्ण बात से अनजान हैं। आप यहां सोच रहे होंगे कि भला कौन सी महत्वपूर्ण बात। यह महत्वपूर्ण बात है जो आपको अधिकार देता है कि घर सही समय पर मिले और आपकी हितों की रक्षा हो सके। यहां हम रेरा यानि रियल एस्टेट रेगुलेटरी नियामक की बात कर रहे हैं। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि करीब तीन-चौथाई घर खरीददार ‘रेरा’ पावर से अनजान हैं। जबकि आप जब कभी किसी भी प्रकार की नई प्रॉपर्टी खरीदते हैं तो आपको इस बात की जानकारी ज़रूर होनी चाहिए कि प्रोजेक्ट रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) के पास पंजीकृत है या नहीं। हाल में देश के प्रसिद्ध रियल एस्टेट सर्च इंजन मैजिकब्रिक्स ने इस बात का खुलासा अपनी रिपोर्ट में की है। रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के करीब 74 फीसदी घर खरीदार को इस बात की जानकारी नहीं है कि रेरा की वेबसाइट पर अपनी प्रॉपर्टी की जांच कैसे करनी है। इस बात का पता लगाने के लिए सर्वे किया गया था।  मैज़िक ब्रिक्स के इस सर्वे में रियल एस्टेट रेगुलेटर एक्ट (रेरा) के बारे में कहा गया कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने के मकसद से बनाया गया है। इसके लागू हो जाने से रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता आएगी। इस बारे में जो रिपोर्ट आई है वो वाकर्इ निराशाजनक है। इस सर्वे के बारे में मैजिकब्रिक्स के संपादकीय और सलाह प्रमुख र्इ. जयश्री कुरुप का कहना है कि कुछ राज्य इस पर तत्परता से काम किया है। वहां पर वेबसाइट के बारे में ग्राउंड  रूट पर पर जानकारी पहुंचार्इ जा रही है। ‘रेरा’ पर बड़ी संख्या में राज्यों ने अभी तक कानून पर अपने स्तर से काम नहीं किया है, इसलिए उपभोक्ताओं की जागरूकता कम है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि  महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश पहले राज्यों में से हैं जिन्होंने ‘रेरा’ अथॉरिटी का गठन किया था। इन राज्यों में एक मई, 2017 से ‘रेरा’ की वेबसाइट चल रही है। महाराष्ट्र के रियल एस्टेट डेवलपर्स ‘रेरा’ प्राधिकरण की वेबसाइट पर अपने प्रोजेक्ट्स को पंजीकृत कर रहे हैं। डेवलपर्स अपने हर प्रकार के विज्ञापनों में वे प्रोजेक्ट की पंजीकरण संख्या का भी जिक्र कर रहे हैं। जहां इसका पालन नहीं किया जाता है, रेरा नियामक उन पर जुर्माने लगा रहे हैं।

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