लिविंग ट्रस्ट यानि चिन्ता से मुक्ति

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Last will and testament
photo courtesyhttps://caringpeopleinc.com/

लिविंग ट्रस्ट के तहत आप अपनी चल-अचल प्रॉपर्टी को अपने इच्छा वारिस को क्रमानुसार हस्तांतरित करते हैं। इसके तहत व्यक्ति पारंपरिक वसीयत योजना को अपनाते हुए ही लिविंग ट्रस्ट की नई राह को अपनाते हैं। इसमें मृत्यु के काफी पहले ही वारिस अथवा पारिवारिक ट्रस्ट को संपत्तियों का हस्तांतरण कर दिया जाता है। इसमें एक ही परिवार को अथवा परिवार की उपशाखाओं को मिलाकर एक ट्रस्ट बनाकर प्रॉपर्टी का हस्तांतरण होता है। इसमें एक फायदा यह भी है कि एक से ज्यादा ट्रस्ट को भी संपत्तियों का हस्तांतरण किया जा सकता है।

लिविंग ट्रस्ट का सिद्धांत भले ही अपने देश में इतना प्रचलन में न हो लेकिन अमेरिका जैसे देशों में इसका खूब प्रचलन है। लेकिन वर्तमान में भारतीय भी लिविंग ट्रस्ट के नए सिद्धांतों को तेजी से अपना रहे हैं। लिविंग ट्रस्ट के सहारे आप अपने वारिस को प्रॉपर्टी देने की योजना को सुखद और आसान बना सकते हैं। यह एक प्रकार का  लिविंग ट्रस्ट वंडरलैंड की वसीयत योजना को प्रक्रिया में लाने में अहम योगदान देता है। यह वसीयत योजना में एक टूल की तरह है। इस कॉन्सेप्ट को समझने के लिए आपको एक उदाहरण पर ध्यान देना होगा।

ये है कहानी

पटना के कंकड़बाग कॉलोनी में एक बुजुर्ग व्यक्ति राधेश्याम जी रहते हैं। उनकी पत्नी का देहांत 3 साल पूर्व हो चुका है। राधेश्याम जी की आयु करीब 80 साल है। इस उम्र में व्यक्ति को स्वास्थ्य सम्बन्धी कई परेशानियों से दो-चार होना पड़ता है। राधेश्याम जी को दो बेटे और दो बेटियां हैं। लेकिन कोई भी उनके देखभाल के आगे नहीं आया। सभी अपनी घर-गृहस्थी बसा चुके हैं। राधेश्याम जी को इस उम्र में भी अपने फाइनेंशियल और व्यक्तिगत कार्य को स्वयं करना होता है। इन चारों में सिर्फ कान्ति देवी ही ऐसी है कि उनके स्वास्थ्य को लेकर चिन्तित और ध्यान रखती हैं। राधेश्याम जी की ईच्छा है कि वह अपनी पूरी प्रॉपर्टी और दिल्ली स्थित एक मकान अपनी बेटी कान्ति देवी को दें। वैसे तो यह आसान है कि एक वसीयत बनाएं और अपनी प्रॉपर्टी का अधिकांश हिस्सा अपनी बेटी कान्ति देवी के नाम कर दें। लेकिन राधेश्याम जी को  चिंता है कि उनकी मृत्यु के बाद उनकी वसीयत को चुनौती दी जाएगी और परिवार के सदस्य आपस में लड़ेंगे। इस परिस्थिति से बचने के लिए जब वह एक्सपर्ट से सलाह ली तो एक्सपर्ट ने लिविंग ट्रस्ट का अमेरिकी सिद्धांत को अपनाने की सलाह दी तो उन्होंने प्रसन्नता पूर्वक उसे स्वीकार कर लिया और अपनी वसीयत योजना को लेकर चिंतामुक्त हो गए।

लिविंग ट्रस्ट एक मॉर्डन कॉन्सेप्ट 

वास्तव में लिविंग ट्रस्ट एक मॉर्डन कॉन्सेप्ट है, जो आपकी अपनी परिसंपत्तियों के बंटवारे का और इसे भविष्य में कोर्ट में चुनौती की भी चिंता से मुक्त हो सकते हैं। जानकारों का कहना है कि आने वाले वर्षों में वसीयत बनाने की प्रथा को ये पीछे छोड़ देगा। लिविंग ट्रस्ट के तहत आप अपनी चल-अचल प्रॉपर्टी को अपने इच्छा वारिस को क्रमानुसार हस्तांतरित करते हैं। इसके तहत व्यक्ति पारंपरिक वसीयत योजना को अपनाते हुए ही लिविंग ट्रस्ट की नई राह को अपनाते हैं। इसमें मृत्यु के काफी पहले ही वारिस अथवा पारिवारिक ट्रस्ट को संपत्तियों का हस्तांतरण कर दिया जाता है। इसमें एक ही परिवार को अथवा परिवार की उपशाखाओं को मिलाकर एक ट्रस्ट बनाकर प्रॉपर्टी का हस्तांतरण होता है।

  लिविंग ट्रस्ट से  फायदे

इसमें एक फायदा यह भी है कि एक से ज्यादा ट्रस्ट को भी संपत्तियों का हस्तांतरण किया जा सकता है। इसी तरह लिविंग ट्रस्ट विभिन्न उद्देश्यों के लिए बनाया जा सकता है, जो वसीयत लिखने वाले के दिमाग में हो। लिविंग ट्रस्ट सिद्धांत के तहत एक से ज्यादा ट्रस्टों को एक ही परिवार की तरह देखा जाता है। लिविंग ट्रस्ट के तहत वसीयत को चुनौती देने का सवाल ही नहीं उठता। इसकी प्रक्रिया भी सरल है। लिविंग ट्रस्ट का सिद्धांत अपनाते समय यह देखा जाता है कि वसीयतकर्ता ने अपनी पूरी जि़दगी में एक ट्रस्ट बनाया हो अथवा फिलहाल एक या उससे अधिक ट्रस्ट हों जो लाभ पाने वालों के हित के लिए वर्तमान समय में भी चल रहा हो। इससे वसीयत योजना के तहत आपको अपनी मृत्यु के काफी पहले प्रॉपर्टी हस्तांतरण में सहूलियत होती है। अंत में यही कि लिविंग ट्रस्ट से यह सुनिश्चित होता है कि आपको अपनी वसीयत योजना से फाइनेंशल नुकसान न हो। क्योंकि आप जीवित रहते ही अपनी प्रॉपर्टी को अपने उत्तराधिकारियों के बीच बांट देते हैं और वह भी तत्काल प्रभावी हो जाता है। इस प्रकार से यह सिद्धांत आपकी प्रॉपर्टी की सही दिशा और देख-रेख में उत्तराधिकारी को देने का व्यवस्था करता है।

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