इंसॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड में होगा बदलाव

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photo-credit https://bankbazaarnews.com

सरकार इंसॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड (आर्इबीसी) के नियम में बदलाव करने जा रही है। इससे होम बॉयर्स के अधिकार और भी मज़बूत होंगे। नये नियम के लागू होने के बाद ये कोड भी बैंकों की तरह ‘फाइनेंशियल क्रेडिटर्स’ का दर्जा मिलेगा। यदि होम बॉयर्स ने घर खरीद लिया और या बुकिंग करवा ली और इसके बाद किसी परिस्थितिवश उक्त रियल एस्टेट कंपनी बैंक्ररप्ट हो जाती है, तब भी घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है। इससे होम बॉयर्स बैंक्ररप्ट प्रोसेस में शामिल होकर बैंकों की तरह रियल एस्टेट कंपनी से अपने पैसे वसूल सकते हैं। ऐसे भी देखा जाय तो आर्इबीसी का गठन एक साल पहले हुआ था। लेकिन प्रभावी बनाने और इससे जुड़ी चिन्ताओं को खत्म करना करना सरकार का मुख्य ध्येय है। इस कदम को इसी तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। सरकार इसे लेकर राष्ट्रपति को अध्यादेश भेजने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय मंत्रिमंडल इस अध्यादेश को राष्ट्रपति के पास भेजेगी और महामहिम की मंजूरी मिल जाने के बाद होम बॉयर्स के अधिकार और मज़बूत हो जाएंगे। इंसॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड के बारे में कॉरपोरेट मामलों के सचिव आर्इ. श्रीनिवास की अध्यक्षता वाली समिति भी बदलाव का सुझाव दे चुकी है। इस प्रस्तावित सुधार से छोटे व्यवसायियों को भी राहत मिलने की उम्मीद है। अक्सर देखा जाता है कि दिवालिया प्रक्रिया के दौरान छोटी कंपनियों के प्रमोटरों पर बोली लगाने की पाबंदी होती है और एसएमर्इ पर इससे बुरा असर पड़ता है। समिति ने आईबीसी की आर्टिकल 29ए में भी सुधार करने का सुझाव भी ने दिया था। ये कुछ लोगों को योग्यता के आधार पर बैंक्ररप्ट प्रोसेस में शामिल होने से रोकती है। इस बदलाव से अहम बात ये होगी कि खस्ताहाल प्रोजेक्ट्स को अपने हाथ में लेने के लिए ज्यादा निवेशक सामने आ सकते हैं और इससे पैसे की तंगी को काफी हद तक ख़त्म किया जा सकता है।

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