रियल एस्टेट के लिए अच्छे दिन

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सरकार किफायती मकानों को बढ़ावा देने मध्‍यम आय वर्ग (एमआईजी) के लिए क्रेडिट लिंक्‍ड सब्सिडी स्‍कीम (सीएलएसएस) के अंतर्गत ब्‍याज सब्सिडी के योग्‍य माने जाने वाले मकानों के कारपेट एरिया में संशोधन को मंजूरी दे दी है। सब्सिडी मकानों के संदर्भ में एमआईजी-I के लिए कारपेट एरिया को ‘120 वर्ग मीटर तक’ से बढ़ाकर ‘160 वर्ग मीटर तक’ और एमआईजी-II के लिए कारपेट एरिया को ‘150 वर्ग मीटर तक’ से बढ़ाकर ‘200 वर्ग मीटर तक’ कर दिया गया है। इससे किफायती मकानों और निर्माण क्षेत्र को काफी बढ़ावा मिलेगा, जिससे आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी।

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LIG FOR CLSS
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LIG FOR CLSS List

(सीएलएसएस – इस संशोधन के बाद एमआईजी स्‍कीम संबंधी विवरण) * सब्सिडी इसी ऋण राशि तक सीमित होगी और इस सीमा से ज्‍यादा की ऋण राशि गैर-सब्सिडी दरों पर मानी जाएगी। ** 01.01.2017 से अर्थात इस योजना के चालू होने की तिथि से प्रभावी

फायदा

  • यह निर्णय निर्माण क्षेत्र को प्रोत्‍साहन प्रदान करेगा। आपूर्ति क्षेत्र में भी गतिविधियां बढ़ेंगी। इस पहल से आर्थिक गतिविधियों में बढ़ोतरी होगी और इससे मांग में भी वृद्धि होगी। इस बढ़ोतरी से अधिक संख्‍या में एमआईजी उपभोक्‍ता सब्सिडी का लाभ प्राप्‍त कर पाएंगे। ये सुविधाएं प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत दी जाती हैं।
  • लाभार्थियों की संख्‍या में वृद्धि होने के साथ ही कारपेट एरिया में वृद्धि से निर्माण गतिविधियों में तेजी आएगी। इससे आवास क्षेत्र को तेजी से आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।
  • भारतीय रिजर्व बैंक ने प्राथमिकता क्षेत्र वाले ऋण (पीएसएल) के लिए पात्रता को संशोधित किया है। इसके तहत महानगरों (10 लाख व इससे अधिक की आबादी) में 28 लाख रुपये की ऋण सीमा को बढ़ाकर 35 लाख रुपये कर दिया गया है। अन्‍य शहरों या केन्‍द्रों के लिए यह सीमा 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी गई है। शर्त यह है कि आवास इकाई की कुल लागत शहरी क्षेत्रों व अन्‍य शहरों में क्रमश: 45 लाख रुपये व 30 लाख रुपये से अधिक न हो।
  • निर्माण गतिविधियों में तेजी आने से सीमेंट, स्‍टील, मशीनरी जैसे क्षेत्रों में भी मांग बढ़ेगी। शहरी क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों में बढ़ोतरी से कुशल व अकुशल कामगारों के लिए रोजगार के नये अवसरों का सृजन होगा।
  • कुल मिलाकर अर्थव्‍यवस्‍था के विकास की गति तेज होगी।
  • 11.06.2018 तक सीएलएसएस का प्रदर्शन
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Performance For Clss
CLSS-Beneficiaries
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 भारतीय रिजर्व बैंक भी रियल्टी सेक्टर पर मेहरबान                                                                      भारतीय रिजर्व बैंक ने प्राथमिकता क्षेत्र वाले ऋण (पीएसएल) के लिए पात्रता को संशोधित किया है। इसके तहत महानगरों (10 लाख व इससे अधिक की आबादी) में 28 लाख रुपये की ऋण सीमा को बढ़ाकर 35 लाख रुपये कर दिया गया है। अन्‍य शहरों या केन्‍द्रों के लिए यह सीमा 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी गई है। शर्त यह है कि आवास इकाई की कुल लागत शहरी क्षेत्रों व अन्‍य शहरों में क्रमश: 45 लाख रुपये व 30 लाख रुपये से अधिक न हो।

निर्माण गतिविधियों में तेजी आने से सीमेंट, स्‍टील, मशीनरी जैसे क्षेत्रों में भी मांग बढ़ेगी। शहरी क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों में बढ़ोतरी से कुशल व अकुशल कामगारों के लिए रोजगार के नये अवसरों का सृजन होगा। कुल मिलाकर अर्थव्‍यवस्‍था के विकास की गति तेज होगी।

यह निर्णय क्यों लिया गया?

एमआईजी के कारपेट एरिया में वृद्धि का निर्णय विभिन्न हितधारकों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर लिया गया है। इस निर्णय से पहले सीएलएसएस के तहत ब्याज सब्सिडी का लाभ कई संभावित लाभार्थियों को नहीं मिल पा रहा था, क्योंकि निर्धारित 120 वर्ग मीटर या 150 वर्ग मीटर से अधिक के कारपेट एरिया वाले घर/ फ्लैट खरदीने या बनाने पर वे एमआईजी के तहत ब्‍याज सब्सिडी पाने से वंचित हो जाते थे। एमआईजी-I तथा एमआईजी-II श्रेणियों के कारपेट एरिया में वृद्धि की पिछले लंबे समय से मांग की जा रही थी। यह बात केंद्रीय नोडल एजेंसी- हुडको और नेशनल हाउसिंग बैंक द्वारा आयोजित कार्यशालाओं और बैठकों में भी सामने आई थी।

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