शाहबेरी गांव में आशियाने ने ले ली जान

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Shahberi Buildings Collapse

आलोक सिंह

नोएडा एक्सटेंशन के शाहबेरी में मंगलवार को देर रात हुई छह मंजिला इमारत गिरने की घटना ने एक बार फिर से हमारे सो-कॉल्ड आधुनिक विकास की चूलें हिला दी हैं। क्या यही वो विकास है जिसका ढिढोंरा पीटा जा रहा है, जिसमें आम आदमी कीड़े-मकोड़े की मौत मरने को मजबूर है ? शाहबेरी से लेकर गाजियाबाद और कासना तक हजारों की संख्या में अवैध इमारतें पिछले दो साल में खड़ी हो गई हैं। वह बिना किसी लेआउट प्लान और सुरक्षा मानको फॉलो किए हुए। 100 गज के जमीन पर 20 से 25 फ्लैट का निर्माण इस एरिया में किया गया है। समझा जा सकता है कि कोई आपदा आने पर क्या स्थिति होगी ? इसके बावजूद अथॉरिटी से लेकर सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। आखिर क्यों सरकार या संबंधित विभाग हाथ पर हाथ दिए बैठा रहा ? वजह साफ है कि इस गोरखधंधे में सभी की मिली भगत है। क्या इसके लिए दोषी सिर्फ बिल्डर और ब्रोकर को ही ठहराया जा सकता है कि जो अपना ईमान पहले ही बेचकर रातों रात करोड़पति बनना का ख्वाब देख रहा है। क्या इसके लिए सरकार और उसके तंत्र दोषी नहीं है जो सिर्फ बड़े-बड़े वादे कर ही जनता को गुमराह करने में माहिर हैं। वहीं सरकारी बाबू करोड़ों के बारे-न्यारे कर चद्दर ओढ़ कर घी पीने का काम कर रहे हैं।

अंधेर नगरी चौपट राजा
कुछ महीने पहले तक रियल एस्टेट कानून (रेरा) आने के बाद स्थिति सुधर में सुधार की उम्मीद की जा रही थी। लेकिन इस कानून के आने के बाद भी हालत में सुधार रत्ती भर नहीं हुआ। वजह रही इस कानून की पेचीदगियां और इसको कमजोर बनाने में राज्यों की भूमिका रही। यूपी में जब सत्ता की चाबी देश के सबसे मजबूत पार्टी के हाथ में आई तब भी लगा कि अब स्थिति बेहतर होगी लेकिन हुआ क्या ? आज भी अथॉरिटी लूट का अड्डा बना हुआ है और आम आदमी (होम बायर्स) दर-दर भटकने को मजबूर। उसकी न तो पहले कोई सुनने वाला था और न अब। पहले बड़े बिल्डर ने सपने दिखा कर ठगे और अब छुटभैये बिल्डर लूटने का काम कर रहे हैं। यूं कहें तो अंधेर नगरी चौपट राजा वाली कहावत यहां पर पूरी तरह फिट है।

प्रलय तो अभी आना है
जिस तरह से बेतरतीब तरीके से शहरीकरण हो रहा है तो बिल्डिंग गिरने की यह घटना एक संकेत मात्र है। ऐसा इसलिए की एनसीआर सिस्मिक-4 जोन में आता है। यानी, भूंकप आने पर सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला एरिया। ऐसे में लाखों की संख्याे में नियम के ताक पर रख कर बने ये अवैध इमारत प्रलय का बुलावा है। अगर, समय रहते नहीं चेता गया तो लाखों के मौत का जिम्मेमदार लेने वाला कोई नहीं होगा। इससे निपटने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। सरकार, उसके अमले और संबंधित अथॉरिटी इस बात को कह कर पल्ला नहीं झाड़ सकते हैं कि वह एरिया उसके क्षेत्र में नहीं आता है। वह तो फ्री होल्ड एरिया है। अरे वह एरिया देश में है पाकिस्तान में नहीं। देश के आम जनता की जिम्मेदारी किस पर है। क्या टैक्स वसूलने तक ही आप की जिम्मेदारी है। यूपी में नोएडा और गाजियाबाद का एरिया हमेशा से यूपी सरकार के लिए दुधारू गाय की तरह रहा है। जितना जो दूध निकाल पाया वह उतना बड़ा सूरमा। यहां रियल एस्टेट से लेकर शिक्षा और स्वास्थ्य न जो आम आदमी की मौलिक जरूरत है पर माफियाओं का कब्जा है। सब जगह लूट मची है लेकिन कोई देखने वाला नहीं है। कानून नाम की बला इन सूरमाओं के लिए नहीं है। शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रॉपर्टी में अराजकता का माहौल है।

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Shahberi Buildings Collapse

लालच में न बरबाद करें अपनी बेशकीमती जिंदगी
बेहतर जिंदगी की कामना हर कोई करता है। यह सभी का अधिकार भी है लेकिन इसकी कीमत आपकी बेशकीमती जान देकर कतई नहीं होनी चाहिए। मेरा आप सभी से निवेदन है कि है आप थोड़ पैसे बचत या स्टेटस मेनटेन करने के लिए ऐसा कोई फैसला न करें जो आप और आपके पूरे परिवार पर भारी पर जाए। आज शाहबेरी या गाजियाबाद इलाके में ये जो अवैध घरों के निर्माण में बाढ़ आ गई है उसके जिम्मेदार हम और आप हैं। हम सभी अपना घर चाह रहे हैं। इसके चक्कर में न सिर्फ हम पेरशानी मोल ले रहे हैं बल्कि अपनी जिंदगी के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हैं। छोटे बिल्डर थोड़े पैसे की बचत और कुछ महीनों में घर देने का आज कल वादा कर रहे हैं। आप अपनी जिंदगी की गाढ़ी कमाई इसमें निवेश कर रहे हैं और परिणाम आपके सामने हैं। मेरी सलाह है कि आप रेंट पर ही रह लें लेकिन जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लें।

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