आम्रपाली की कारस्तानी, अपने लोगों को बेचे कौड़ियों के भाव फ्लैट्स

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लीजिए आम्रपाली ग्रुप का एक और कारस्तानी देखिए. ग्रुप ने पॉश फ्लैटों को महज एक रुपये, पांच रुपये और 11 रुपये प्रति स्क्वेयर फीट की कीमत पर 500 से अधिक लोगों के नाम पर बुक कर दिया.इतना ही नहीं जब सुप्रीम कोर्ट  के सामने आम्रपाली का काला चिट्ठा खुला तो पता चला कि चपरासी-ड्राइवर के नाम पर 23 कंपनियां रजिस्टर्ड हैं. ये सारी कंपनियां आम्रपाली कंसोर्टियम का हिस्सा थीं और उनका इस्तेमाल मकान खरीदने वालों के पैसों को डाइवर्ट करने के लिए किया गया. दो फॉरेंसिक ऑडिटर्स ने सर्वोच्च न्यायालय से कहा कि उन्होंने 655 ऐसे लोगों को नोटिस भेजा, जिनके नाम पर ‘बेनामी’ फ्लैट्स की बुकिंग की गई थी, लेकिन 122 ऐसे जगहों पर कोई नहीं मिला. न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा तथा यू.यू. ललित की पीठ को सौंपी गई फॉरेंसिक ऑडिटर्स की अंतरिम रिपोर्ट में कहा गया है कि मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) चंद्र वाधवा ने बीते साल 26 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में पेश होने से महज तीन दिन पहले ‘अज्ञात लोगों’ को 4.75 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे. सुप्रीम कोर्ट ने फॉरेंसिक ऑडिटर्स से आयकर विभाग के ऑर्डर्स को पेश करने को कहा, जिसने 2013-14 में की गई अपनी जांच और जब्ती के दौरान आम्रपाली ग्रुप के सीएमडी अनिल शर्मा से एक करोड़ रुपये और निदेशक शिव प्रिया से एक करोड़ रुपये के अलावा 200 करोड़ रुपये के बोगस बिल और वाउचर बरामद किए थे. सुप्रीम कोर्ट ने अपनी जांच के दायरे में यह पाया कि कंपनी ने बहुराष्ट्रीय कंपनी जेपी मॉर्गन रियल एस्टेट फंड को भी ले लिया है, जिसने साल 2010 में शेयर खरीदकर आम्रपाली जोडियक में 85 करोड़ रुपये का निवेश किया था और बाद में उसे आम्रपाली की ही कंपनियों को बेच दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न परियोजनाओं के लाखों खरीदारों को राहत देने के लिए पीठ ने पक्षों तथा नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों से उनके फ्लैटों के पंजीकरण के लिए कानूनी सुझाव भी मांगे हैं. इस मामले की सुनवाई की अगली तारीख 24 जनवरी तय की गई है.

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